अमृत कौर ने धर्म नहीं, नौकरी छोड़ी

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क्यूबैक: सिख कौम पूरी दुनिया में बहादुरी और हर एक की मदद करने के तौर पर जानी जाती है। सिखों ने भारत, अमेरिका और कनाडा समेत दुनिया के कई देशों के विकास में मुख्य योगदान दिया है, लेकिन सिखों को समय-समय पर कई तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है। सिख अपने धर्म के आगे किसी भी चीज को आने नहीं देते, चाहे वह फिर उनकी नौकरी ही क्यों न हो। ऐसा ही एक मामला कनाडा के क्यूबैक से सामने आया है जहां एक टीचर अमृत कौर ने अपनी नौकरी इसलिए छोड़ दी क्योंकि अब नौकरी पर आने के लिए दस्तार पहनने पर रोक लगा दी गई है।

दरअसल कनाडा के क्यूबैक में बिल 21 लागू हो गया है जिसके बाद सिर ढंककर नौकरी करना मुश्किल हो गया है। यह बिल लागू होने के बाद मॉन्ट्रियल के एक स्कूल में पढ़ाने वाली अमृत कौर दस्तार पहनना छोड़ने या नौकरी छोड़ने का दबाव था। कनाडा में वर्ल्ड सिख ऑर्गेनाइजेशन की उपाध्यक्ष अमृत कौर ने कहा है कि बिल 21 लागू करके क्यूबैक सरकार ने उन लोगों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि क्यूबैक में अब उन लोगों के लिए अब कोई नौकरी नहीं है जो अपना सिर ढंककर नौकरी करते हैं। अमृत कौर अब क्यूबैक को छोड़कर ब्रिटिश कोलंबिया जाने की तैयारी कर रही है। उसने कहा कि वह ब्रिटिश कोलंबिया में जाकर नई नौकरी ढूंढेगी। अमृत कौर ने कहा कि उसे यह कहते हुए दुख होता है कि क्यूबैक में दस्तार पहनने वाले लोगों को अच्छा नहीं माना जाता और अपने परिवार में दस्तार पहनने वाली वह अकेली महिला है। अमृत कौर ने कहा कि वह बीसी में नौकरी करना पसंद करेगी क्योंकि वहां पर कोई भेदभाव नहीं होती जबकि उसकी मां अरविंदर कौर ने कहा कि सब कुछ ही समय के लिए है और बाद में सब कुछ ठीक हो जाएगा।

पूरे कनाडा में इस बिल का बहुत विरोध हुआ है, लेकिन क्यूबैक सरकार यह बिल लागू करवाने में सफल रही है। इस बिल 21 के खिलाफ अदालत में एक याचिका दायर की गई है।