चंबा: गरीबों के आशियाने खतरे में, नगरपालिका ने जारी किए नोटिस

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चंबा (साहिल शर्मा): एक तरफ केंद्रीय और प्रदेश सरकार आवास योजना के तहत गरीबों को कच्चे मकानों की जगह पक्के मकान बनाकर आवंटित कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इसी सरकार के नुमाइंदे चंबा में 30 से 35 वर्ष बने मकानों में रह रहे गरीब लोगों को यह कह कर नोटिस जारी कर रहे हैं कि कि जिस जगह यह मकान बने हुए वह नगरपालिका की जमीन है और इस जगह में बने हुए मकान बिना नक्शा पास किये हुए हैं और यह गैर कानूनी हैं।

30-35 साल से रह रहे हैं लोग
चंबा नगरपालिका ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए और जल्द से इस जगह को खाली करने के आदेश जारी कर दिए है। इसमें सबसे बड़ी बात देखने योग्य यह भी है कि गरीबी के आलम में जी रहे करीब 30 परिवार के लोग जो पिछले 30 से 35 वर्ष इसी जगह झुग्गी-झोपड़ी में निर्वाह किया करते थे तो अब इन लोगों ने पाई-पाई जोड़कर थोड़े से पक्के मकान क्या बना लिए प्रशासन के लोगों पर सरकारी डंडा चला दिया है।

लोगों के दिए जगह खाली करने के आदेश
नाले के साथ बने कुछ पक्के तो कुछ कच्चे मकान उन गरीब लोगों के है जिनके घर वाले सारा दिन सड़कों पर मजदूरी करते है तो उनकी पत्नियां दूसरों के घरो में बर्तन मांजकर अपने बच्चों और अपने परिवार का पेट बड़ी मुश्किल से पालती है। यह गरीब लोग पिछले 30 से 35 सालों से इसी जगह रह रहे है और अब इन लोगों ने पैसा-पैसा जोड़कर रहने योग्य अपने छोटे-छोटे लेंटर वाले घर बना लिए है। अब यह बात नगरपालिका को हजम नहीं हुई और उन्होंने यह कहकर नोटिस जारी कर दिए है कि पहले तो यह जगह नगरपालिका की है और इन लोगों ने जो भी मकान बना लिए है, उसका इन लोगों ने नक्शा तक नहीं बनाया है। कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए इन लोगों को जगह खाली करने तक के आदेश दे दिए है।

अब हम कहां जाएं
आँखों में आंसू लिए एक महिला ने बताया कि 35 वर्ष पहले उसके पति का निधन हो गया था और चार साल पहले उसके इकलौते बेटे की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। यह रह रहे लोगों ने बताया कि उनकी किसी ने कोई मदद नहीं की है। हम लोगो ने दूसरों के घरो में जूठे बर्तन मांजकर बड़ी मुश्किल के साथ अपने और अपने बच्चों को पढ़ा रहे है और परिवार का पालन पोषण कर रहे है। एक महिला ने बताया कि आज तक उसका आईआरडीपी नंबर तक नहीं बना है। इस महिला का यह भी कहना है कि पिछले 30 सालों से हम लोग इसी जगह में रह रहे है और जब हम लोगों ने मकान बनाना शुरू किया तो उसी समय हमें रोकना चाहिये था, अब हम लोग कहां जाएं। अगर हमे इसी तरह तंग किया तो हम सीधे डीसी महोदय के पास बच्चों को लेकर खड़े हो जायेंगे।

बात न बनी तो बच्चों सहित करेंगे आत्मदाह
इस सड़ांध भरे नाले में बने इन मकानों की बात की जाये तो कुछ एक मकानों को छोड़कर बाकि के बने मकानों की हालत देखकर कोई भी सधारण व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि वास्तव में यह मकान किसी मनुष्य के ही होंगे। इसको लेकर हमारी टीम ने वहां जाकर देखा तो दंग रह गए। 6 बाई 5 के इस कमरे में एक तरफ बिस्तर तो दूसरी तरफ खाना बनाने का चुल्ला जिसमे मजदूरी करने गए लोगों रहते है। खैर, वह लोग तो उस समय वहां पर मिले नहीं, लेकिन छोटे से पक्के मकान को बनाने वाली एक महिला मिली जिसने बताया कि इस जगह वह पिछले 30 सालों से रह रही है। उसने बताया कि शादी से पहले उनके सास-ससुर रहते थे और अब हम लोग रह रहे है। उसने बताया कि पहले बिजली नहीं थी, बोलने पर बिजली भी लग गई। एक साल तक इसी जगह मेरे घर का काम चलता रहा, किसी ने कुछ नहीं कहा। अब जब हम इस जगह पर बस चुके है तो कमेटी वालों ने हमें नोटिस थमा दिए है। महिला ने कहा कि जिसको हमने अपने वोट दिए हैं, वही अब हमें बचाये। अगर हम लोगों को यहां से उठने के लिए मजबूर किया गया तो हम सभी लोग सड़को पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। अगर फिर भी कुछ नहीं बना तो हम अपने बच्चों सहित यहीं पर आत्मदाह कर लेंगे।

इन लोगों ने अपने बलबूते बनाए मकान
इसी जगह रह रहे एक स्थानीय व्यक्ति जिसकी खुद की अपनी जमीन है, ने बताया कि इन लोगों ने हमारे मकान बनने से पहले मकान बनाये हुए है और यह लोग 30-35 सालों से यहां रह रहे हैं। इन लोगों का समर्थन करते हुए उसने कहा कि जिस तरह मोदी सरकार गरीबों को नए मकान बनवाकर दे रही है, उसी तरह इनको भी मकान मिलने चाहिए। इन लोगों ने अपने बलबूते पर यहां मकान बनाए हुए हैं। उन्होंने सरकार से गुजारिश करते हुए कहा है कि इनके मकानों को तोड़ा न जाये। उन्होंने कहा कि इन मकानों में यह लोग ही नहीं, बल्कि इनके बच्चे भी रहते है। उन्होंने बताया कि बने हुए इन मकानों में बिजली के मीटर और इन लोगों के राशनकार्ड और वोटर कार्ड तक बने हुए है।