हरियाणा में खेल कोटे की नीति में बदलाव कारण कर्मचारियों की नौकरी पर लटकी तलवार

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हरियाणा सरकार ने हाल ही में प्रदेश में 18 बजार से ज्यादा युवाओं को ग्रुप-डी में नौकरी दी है और चयनित उम्मीदवारों ने अपने अपने विभागों में ज्वाइनिंग भी कर रहे है, यहां तक तो सब ठीक है, लेकिन सरकार ने खेल कोटे के तहत भी ग्रुप-डी में भर्ती की हैं, लेकिन अब जो खेल कोटे के तहत उम्मीदवार इस भर्ती में चयनित हुए थे उनमें से कई उम्मीदवारों पर नौकरी पर तलवार लटक गई हैं।

दरअसल जो उम्मीदवार जिस खेल ग्रेडेशन सर्टिफिकेट के आधार पर लगे थे, उन्हें अब खेल विभाग ने सही मानने से इंकार कर दिया है। भर्ती हुए कर्मचारियों के संबंधित विभाग खेल विभाग में उनके सर्टिफिकेट भेज कर जांच करवा रहा है, जिसके जवाब में खेल विभाग उन सर्टिफिकेटों को रद्द मानने के लिए कह रहा है। ऐसे में भर्ती हुए कर्मचारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है कि करे तो आखिर वे क्या करें।

वहीं खेल अधिकारियों का कहना है कि ये सब इसलिए हो रहा है क्य़ोकि सरकार ने 25 मई 2018 को नई खेल ग्रेडेशन नीति बनाई हैं और नियमों में बदलाव के कारण इन कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस नई खेल ग्रेडेशन नीति में कहा गया है कि जिन खिलाड़ियों के खेल ग्रेडेशन सर्टिफिकेट बनने हैं वे अपने ग्रेडेशन की दोबारा जांच कराए, इस जांच में जिनके ग्रेडेशन सही होंगे उनके सर्टिफिकेट दोबारा जारी कर दिए जाएंगे। बता दे कि पहले राज्य स्तर पर और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी जैसी प्रतियोगिता में शामिल होने पर ही ये सर्टिफिकेट जारी किए जाते थे लेकिन अब पदक जीतने पर ही ग्रेडेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है।

इस पूरे मामले पर खेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक खेमका ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने खेल कोटे से नौकरी ली है वो अपने सर्टिफिकेट की जांच करा लें, सही पांए जाने पर उनके सर्टिफिकेट दोबारा जारी कर दिए जाएंगे। अब सबसे बड़ी दिक्कत ये हैं कि उन चयनित उम्मीदवारों को समझ ही नहीं आ रहा कि करे तो वे क्या करे।

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