इन पांच जजों ने सुनाया अयोध्या पर फैसला

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नई दिल्ली: अयोध्या पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में आदेश दिया है कि विवादित जमीन पर मंदिर बनाया जाए और मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़़ जमीन अलग से दी जाए। भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने यह फैसला सुनाया। इस पीठ में पांच जज शामिल हैं। फैसले सुनाने से पहले ही सरकार ने इन जजों की सुरक्षा बढ़ा दी है। आइए जानते हैं उन पांच जजों के बारे में जिन्होंने अयोध्या पर फैसला सुनाया है।

इस पीठ में भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्दुल नजीर शामिल हैं। असम के रहने वाले जस्टिस रंजन गोगोई साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त हुए थे और 17 नवंबर को वह रिटायर हो रहे हैं। प्रैक्टिस करने के बाद 28 फरवरी 2001 को उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया था। यहां से उन्हें बाद में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट भेजा गया था। साल 2011 में उन्हें चीफ जस्टिस बनाया गया था और साल 2012 में जस्टिस रंजन गोगोई को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था।

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साल 2011 में जस्टिस बोबडे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज के रूप में काम शुरू किया था। साल 2012 में वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने थे और अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति कर दी गई थी और अब वह देश के अगले चीफ जस्टिस बनने जा रहे हैं।

जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड मार्च 2000 में बॉम्बे हाईकोर्ट के जज बने थे। उनके पिता वाई.वी. चंद्रचूड लंबे समय तक भारत के चीफ जस्टिस के पद पर रहे थे। मई 2016 में जस्टिस चंद्रचूड को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था।

जस्टिस अशोक भूषण को 22 साल प्रैक्टिस करने के बाद 2001 इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। उन्हें साल 1979 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी। 13 मई 2016 को उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में की गई।

1983 में कर्नाटक हाईकोर्ट से वकालत शुरू करने वाले जस्टिस एस. अब्दुल नजीर को फरवरी 2003 में कर्नाटक हाईकोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त किया गया था और फरवरी 2017 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया।